बाज़ार ही हमारी कक्षा है
हमारे उदाहरण किताबों से नहीं, सब्ज़ी मंडी, किराना दुकान और मॉल की असली गलियों से आते हैं। आप वही देखते हैं जो रोज़ आपके सामने होता है।
खरीदारी के मनोविज्ञान का कार्यक्रम
हर बार जब आप हाथ बढ़ाकर कोई चीज़ उठाते हैं, उसके पीछे एक छोटा-सा फ़ैसला चल रहा होता है। क्रयमन उसी फ़ैसले को धीरे-धीरे खोलकर दिखाता है।
क्रयमन · मन का प्रयोगशाला · दिल्ली
हमारे तरीके की पहचान
हमारे उदाहरण किताबों से नहीं, सब्ज़ी मंडी, किराना दुकान और मॉल की असली गलियों से आते हैं। आप वही देखते हैं जो रोज़ आपके सामने होता है।
हम आपको यह नहीं बताते कि क्या खरीदें या क्या नहीं। हम सिर्फ़ यह दिखाते हैं कि छूट, कमी और भीड़ आपके मन पर कैसे असर करती हैं, ताकि फ़ैसला आपका ही रहे।
हर सत्र एक छोटे प्रयोग से शुरू होता है। पहले आप खुद अपनी प्रतिक्रिया नोट करते हैं, फिर हम साथ बैठकर उसका कारण टटोलते हैं।
क्रयमन क्या है
हम एक सीधा सवाल पूछते हैं: हम वह चीज़ क्यों खरीदते हैं जो हमने खरीदने की सोची भी नहीं थी? इसका जवाब न चालाकी में है, न कमज़ोरी में। वह हमारे सोचने के स्वाभाविक ढंग में है।
क्रयमन लर्निंग उसी ढंग को आम भाषा में समझाता है। विद्यार्थी, दुकानदार, परिवार चलाने वाले और उद्यमी, सब यहाँ एक ही जिज्ञासा लेकर आते हैं।
मैदान से नोट्स
कार्यक्रम के मॉड्यूल
जानिए कि "आज ही" और "सिर्फ़ दो बचे" जैसे शब्द मन पर क्या करते हैं। आप खुद की एक असली खरीद का विश्लेषण करेंगे।
हम अकसर वही उठाते हैं जो दूसरे उठा रहे हों। यह सत्र दिखाता है कि सामाजिक संकेत कैसे हमारी पसंद को चुपचाप मोड़ते हैं।
अंत में आप एक निजी "रुकने का नियम" बनाते हैं, जो ऑनलाइन और दुकान, दोनों जगह आपके काम आए।
"पहले मुझे लगता था कि मैं सामान चुनता हूँ। अब दिखता है कि सामान भी मुझे चुनने के तरीके सिखाता है। बस इतना जानना काफ़ी बदलाव था।"
नेहा सक्सेना · प्रतिभागी, लखनऊ · छोटे कारोबार की संचालिका
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