कमी का असर
“सिर्फ़ 2 बचे हैं” पढ़ते ही चीज़ की क़ीमत बढ़ी लगती है।
साप्ताहिक हाट में आख़िरी ढेर की जल्दी इसका उदाहरण है।
“जिस पैटर्न का नाम आप जानते हैं, उसके आगे आप थोड़ा ठहर सकते हैं।”
पाँच पैटर्न
“सिर्फ़ 2 बचे हैं” पढ़ते ही चीज़ की क़ीमत बढ़ी लगती है।
साप्ताहिक हाट में आख़िरी ढेर की जल्दी इसका उदाहरण है।
₹2,999 की कटी हुई क़ीमत के बगल में ₹1,499 सस्ता लगता है।
चाहे चीज़ की असली क़ीमत जो भी हो, पहला दाम तुलना का लंगर बन जाता है।
शाम तक दर्जनों छोटे फ़ैसलों के बाद मन थक जाता है।
तभी हम काउंटर के पास रखी चीज़ें आसानी से उठा लेते हैं।
मैदानी चित्र
मोल-भाव का पहला दाम, लेबल पढ़ने का धैर्य और काउंटर पर आख़िरी प्रलोभन — पाँचों पैटर्न रोज़ के बाज़ार में बिखरे रहते हैं।
कार्यशाला में आप इन्हें असली बाज़ार में पहचानना सीखते हैं।
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